Prayagraj Waterlogging हाईकोर्ट में नगर आयुक्त और डीएम
फाइल फोटो- इलाहाबाद उच्च न्यायालय

Prayagraj Waterlogging के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त शीलम साई तेजा और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा कोर्ट में उपस्थित हुए। अधिकारियों ने शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की जानकारी कोर्ट को दी।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसे जल्द खत्म करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जलभराव को 24 से 48 घंटे के भीतर समाप्त किया जाए, ताकि लोगों को परेशानी से राहत मिल सके।

Prayagraj Waterlogging पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

Prayagraj Waterlogging High Court Hearing

प्रयागराज शहर में लगातार जलभराव की स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने प्रयागराज के नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को 20 अगस्त को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया था।इसी दौरान जलभराव से संबंधित एक अन्य जनहित याचिका, जो एकलपीठ के समक्ष लंबित थी, उसे भी इसी खंडपीठ के साथ जोड़ दिया गया।बुधवार को सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त शीलम साई तेजा और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा न्यायालय में उपस्थित हुए।नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में हलफनामा भी दाखिल किया जाएगा।कोर्ट के समक्ष अधिकारियों की ओर से शहर में जल निकासी और जलभराव से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।

सुनवाई के दौरान दारागंज मोरी गेट से जल निकासी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई। जल निकासी के लिए कोर्ट की ओर से अनुमति दिए जाने के बाद प्रशासन और नगर निगम के सामने जलभराव की समस्या को जल्द दूर करने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।शहरी इलाकों में लंबे समय से जमा पानी के कारण लोगों को आवागमन, कारोबार और दैनिक गतिविधियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कोर्ट के निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हाईकोर्ट ने शहरी इलाकों में जलभराव को जल्द से जल्द खत्म करने पर जोर दिया। कोर्ट ने 24 से 48 घंटे के भीतर जलभराव समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।जलभराव खत्म करने के साथ-साथ शहर की जल निकासी व्यवस्था को प्रभावी बनाने और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी कोर्ट की नजर है।सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश शहरी विकास विभाग के सचिव की ओर से भी हलफनामा दाखिल किया जाएगा।नगर आयुक्त की ओर से भी जलभराव की समस्या से संबंधित कार्ययोजना और उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के माध्यम से कोर्ट के सामने रखी जाएगी।मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान प्रशासन और शहरी विकास विभाग की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामे महत्वपूर्ण होंगे।अब निगाह इस बात पर है कि प्रयागराज शहर में जलभराव खत्म करने के लिए प्रशासन की कार्ययोजना कितनी प्रभावी साबित होती है और अगली सुनवाई में हाईकोर्ट के सामने क्या स्थिति रखी जाती है।