Prayagraj Naz Hospital में प्रसव के बाद पत्नी की मौत के मामले में जौनपुर निवासी दीनानाथ मौर्य अपनी मासूम बेटी को गोद में लेकर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। दीनानाथ ने अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था, इलाज के दौरान उपलब्ध सुविधाओं और संबंधित चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता एवं डिग्री की जांच कराने की मांग की है। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मेडिकल बोर्ड गठित किए जाने की बात सामने आई है।
Prayagraj Naz Hospital में प्रसव के बाद बिगड़ी हालत
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में दीनानाथ मौर्य ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती थीं। सामान्य प्रसव की उम्मीद में वह 25 अक्टूबर 2025 को पहली बार अस्पताल पहुंचे थे। इसके बाद जुलाई 2026 तक उनकी पत्नी का इलाज वहीं चलता रहा।दीनानाथ के आरोप के मुताबिक, 17 जुलाई 2026 को वह पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां सामान्य प्रसव से बच्ची का जन्म हुआ। उनका कहना है कि प्रसव के बाद पत्नी की हालत बिगड़ने लगी।दीनानाथ ने आरोप लगाया कि उस समय अस्पताल में कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद नहीं था। पत्नी दर्द से कराहती रहीं और चिकित्सक को बुलाने के बावजूद तत्काल उपचार नहीं मिल सका। उनके मुताबिक, सुबह करीब छह बजे चिकित्सक के पहुंचने और मरीज को आईसीयू में ले जाने की बात कही गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।इसके बाद उन्हें पत्नी को एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।
दूसरे अस्पताल में महिला को मृत घोषित करने का दावा
दीनानाथ का दावा है कि जब वह पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके मुताबिक, वहां बताया गया कि महिला की मृत्यु कई घंटे पहले ही हो चुकी थी।इसके बाद दीनानाथ पत्नी का शव लेकर वापस अस्पताल पहुंचे। वहां हंगामा हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।दीनानाथ ने आरोप लगाया कि सामान्य प्रसव के नाम पर उनसे करीब 51 हजार रुपये लिए गए थे। हालांकि उनका कहना है कि उनकी लड़ाई पैसे को लेकर नहीं है। वह अपनी पत्नी और अपनी मासूम बेटी की मां को खोने के बाद जवाब चाहते हैं।उन्होंने कहा कि जिस बच्ची के जन्म का वह और उनकी पत्नी महीनों से इंतजार कर रहे थे, उसी बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां हमेशा के लिए उससे दूर हो गई।दीनानाथ के मुताबिक, आज उनकी गोद में बेटी है, लेकिन उसे मां का प्यार देने वाली उसकी मां नहीं है। उनका कहना है कि बच्ची बड़ी होकर जब अपनी मां के बारे में पूछेगी तो उनके लिए उस सवाल का जवाब देना सबसे मुश्किल होगा।
सीएमओ से शिकायत के बाद मेडिकल बोर्ड गठित
दीनानाथ के मुताबिक, घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिकायत करने और जांच के बाद कार्रवाई की बात कही गई।उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीएमओ कार्यालय में शिकायत की। दीनानाथ का कहना है कि शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है।अब उनकी निगाह मेडिकल बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इलाज के दौरान किन परिस्थितियों में महिला की मौत हुई और लगाए गए आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।दीनानाथ ने Prayagraj Naz Hospital की मान्यता, चिकित्सकीय सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।इसके साथ ही उन्होंने संबंधित चिकित्सक की शैक्षिक योग्यता और चिकित्सकीय डिग्री की भी संबंधित विभाग से जांच कराने की मांग की।उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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रिपोर्ट- नीरज शर्मा प्रयागराज



