इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भदोही की एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए पूर्व विधायक विजय मिश्रा की बहू रूपा मिश्रा को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक (निलंबन) लगाते हुए अपील के अंतिम निस्तारण तक उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने पारित किया। सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि रूपा मिश्रा एक महिला हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उनके खिलाफ अभियोजन पक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका है। यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है, जबकि अपील का शीघ्र निस्तारण संभव नहीं है। ऐसे में सजा के दौरान अपील लंबित रहने की स्थिति में उन्हें राहत दी जानी चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि रूपा मिश्रा का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।वहीं, राज्य सरकार की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि रूपा मिश्रा पूर्व विधायक विजय मिश्रा की बहू हैं, जिनके खिलाफ 84 आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि, सरकारी पक्ष ने यह स्वीकार किया कि स्वयं रूपा मिश्रा का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें चार वर्ष की सजा सुनाई गई है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने ‘भूपतजी सरताजजी जबरजी ठाकोर बनाम गुजरात राज्य’ मामले में यह सिद्धांत स्थापित किया है कि निश्चित अवधि की सजा वाले मामलों में, यदि अपील लंबित है और उसके शीघ्र निस्तारण की संभावना नहीं है, तो सजा निलंबित कर जमानत दी जा सकती है।इसी सिद्धांत और मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने रूपा मिश्रा की सजा को निलंबित कर दिया। अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत मुचलके और दो विश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत देने का आदेश दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अवधि के दौरान रूपा मिश्रा को न्यायालय की कार्यवाही में पूरा सहयोग करना होगा। साथ ही उन्हें किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होना होगा। मामले की अंतिम सुनवाई तक उन्हें अदालत द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना होगा।