
राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में लोकतंत्र सेनानी संघ, मध्य प्रदेश के तत्वावधान में लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन का आयोजन किया गया। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश सहित देशभर से करीब दो हजार लोकतंत्र सेनानी शामिल हुए। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मौजूद रहे। इस अवसर पर कई वरिष्ठ भाजपा नेता, लोकतंत्र सेनानी संघ के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस दौरान उन्होंने पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी का विशेष सम्मान किया। साथ ही पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, 95 वर्षीय वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी शांतिलाल संघवी और 95 वर्षीय लक्ष्मीनारायण पाटीदार सहित कई वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।सम्मेलन में मंच पर मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कैलाश सोनी, प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, मंत्री कृष्णा गौर, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया तथा विधायक रामेश्वर शर्मा सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आपातकाल पर आधारित विशेष लघु फिल्म रही।

लोकतंत्र प्रहरी संघ के अध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल द्वारा तैयार इस फिल्म में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए हुए संघर्ष, आंदोलन और जेल में बिताए गए कठिन दिनों को दर्शाया गया। फिल्म के प्रदर्शन के दौरान अनेक लोकतंत्र सेनानी भावुक नजर आए।सम्मेलन में सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी संदेश भी प्रमुखता से दिखाई दिया। आयोजन स्थल पर गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग के समर्थन में विशेष हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। लोकतंत्र सेनानियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उपस्थित नागरिकों ने इस अभियान में भाग लेकर अपने हस्ताक्षर किए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक कठिन दौर था, जिसमें अनेक लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जेल की यातनाएं झेलीं। ऐसे लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है।सम्मेलन के माध्यम से लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों के योगदान को याद किया गया और उनके साहस, त्याग तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण को सम्मान दिया गया।
