
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़े एक मामले में महिला अभ्यर्थी को अंतरिम राहत देते हुए उसके कद (लंबाई) का दोबारा मापन कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित कर अभ्यर्थी की लंबाई की पुनः जांच कराने और उसकी रिपोर्ट 29 जून को सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुनर्मापन में अभ्यर्थी का दावा गलत पाया जाता है, तो उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।याचिका में महिला अभ्यर्थी ने बताया कि उसने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की थी। इसके बाद वह शारीरिक मानक परीक्षण (पीएसटी) में शामिल हुई। आरक्षित महिला वर्ग के लिए न्यूनतम लंबाई 152 सेंटीमीटर निर्धारित है, जबकि उसकी लंबाई 152.1 सेंटीमीटर होने के बावजूद उसे बिना किसी लिखित आदेश या कारण बताए अयोग्य घोषित कर दिया गया।अभ्यर्थी ने अदालत को यह भी बताया कि पिछली उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में इसी लंबाई के आधार पर उसे शारीरिक मानक परीक्षण में सफल घोषित किया गया था। इसके बावजूद इस बार उसे अयोग्य ठहराया जाना मनमाना और नियमों के विपरीत है।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि अभ्यर्थी को अयोग्य घोषित किए जाने का कोई लिखित कारण उपलब्ध नहीं कराया गया था। इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया।चूंकि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) 29 जून से 1 जुलाई के बीच प्रस्तावित है, इसलिए अदालत ने अभ्यर्थी के हितों की रक्षा के लिए तत्काल मेडिकल बोर्ड से पुनर्मापन कराने का निर्देश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड निष्पक्ष रूप से लंबाई का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे, ताकि मामले में आगे उचित आदेश पारित किया जा सके।हाईकोर्ट का यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मानकों के निर्धारण को लेकर विवाद का सामना कर रहे हैं।
